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प्रश्न : स्वामीजी ! आत्मा क्या है ?

प्रश्न : स्वामीजी ! आत्मा क्या है ?
उत्तर :: आत्मा अर्थात मेरा 'शुद्ध होना ' ,निजस्वरूप ,स्वरूप .
नाम-रूप के परे जो हमारा "होनापन " है ,हमारा "सत्व" है ,सत्ता है ,वही आत्मा है .
यह 'आत्मा ' चैतन्य स्वरूप है ,बोध स्वरूप है ,ज्ञान स्वरूप है ,अमृत स्वरूप है .
इसका अनुभव शांत मन में होता है ,समाधी में होता है .
"ध्यान " इसका साधन है .ध्यान अर्थात मन के साक्षी होना .