एक भक्त ने गुरूजी से कहा जब मृत्यु सभी की होनी है । तो हम सत्संग भजन सेवा सिमरन क्यों करे जो इंसान मौज मस्ती करता है मृत्यु तो उसकी भी होगी गुरूजी ने बहुत ही सुन्दर जवाब दिया
बिल्ली जब चूहे को पकड़ती है तो दांतो से पकड़कर उसे मार कर खा जाती है । लेकिन उन्ही दांतो से जब अपने बच्चे को पकड़ती है तो उसे मारती नहीं बहुत ही नाजुक तरीके से एक जगह से दूसरी जगह पंहुचा देती है दांत भी वही है मुह भी वही है पर परिणाम अलग अलग । ठीक उसी प्रकार मृत्यु भी सभी की होगी पर । एक प्रभु के धाम में । और दूसरा 84के चक्कर में प्रभु के धाम का गुरूजी ने एक ही मार्ग बताया है
सेवा सिमरन सत्संग भजन