निर्विचार चेतन्यता निर्विचार हौश निर्विचार सजगता शुन्य चेतन्य ये सब आत्मा के पर्याय वाची शब्द है।कबीर ने ईसे निशब्दी शब्द कहा और संतौ नै जिसे नाम कहा वौ नाम निर्विचार हौश कौ कहा ईस निर्विचार हौश मे बने रहना ही सुमीरण है।बाकी सारी साधनाए यहाँ तक पहुचाने की है।
कलयुग मे केवल नाम के सुमिरण से ही मुक्त हुआ जा सकता है।यह निर्विचार हौश रूपी दशा ही नाम है।