एक भक्त ने गुरूजी से पूछा कि
जब मृत्यु सभी की होनी है ।
तो हम साधना सेवा और सत्संग
क्यों करे
जो इंसान मौज मस्ती करता है
मृत्यु तो उसकी भी होगी
गुरूजी ने बहुत ही सुन्दर जवाब दिया
बिल्ली जब चूहे को पकड़ती है तो
दांतो से पकड़कर उसे मार कर
खा जाती है।
लेकिन उन्ही दांतो से जब अपने बच्चेको
पकड़ती है तो उसे मारती नहीं
बहुत ही नाजुक तरीके से एक जगह से
दूसरी जगह पंहुचा देती है
दांत भी वही है मुह भी वही है
पर परिणाम अलग अलग ।
ठीक उसी प्रकार मृत्यु भी सभी की
होगी पर,
- एक प्रभु के धाम में और
- दूसरा 84 के चक्कर में
प्रभु के धाम का गुरूजी ने
एक ही मार्ग बताया है
!! साधना, सेवा, और सत्संग !