मंदिर का अर्थ मन के अंदर ही होता है। आप उन्हें सत्संग में या किसी राम कथा/भागवत कथा आदि में लेकर जा सकते हैं, जिनके माध्यम से शायद कोई पूर्ण सतगुरु मिल जाएँ और भगवान् के हमारे अंदर ही दर्शन करा दें।