वर्ष 2007 मैं समर्पण के साथ साथ पुरे विश्व में एक अभूतपूर्व घटना घटित हुए। समर्पण ध्यान मैं पहला गहन ध्यान अनुष्ठान आयोजित किया गया और पहेली जिवंत सदगुरू की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा उसी के द्वारा की गई।
यह 45 दिन के अनुष्ठान के द्वारान पूज्य गुरुदेव ने कई संदेश साधको को दिए। इस संदेश को बुक के रूप में साधको तक पहुंचा या गया। उस पुष्तक का नाम है "आध्यात्मिक सत्य"।
यहाँ पे दी गई फ़ोटो मैं उसी पुस्तक के कुछ सूत्र गुजराती भाषा मैं लिखे हुए है।
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