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अशुध्ध मन सदगुरु की याद में भी जुड़े तो वो शुध्ध हो जाता है।

अशुध्ध जल में अगर एक बून्द गंगा की गिरे तो वो शुध्ध हो जाता है।
और अगर अशुध्ध जल गंगा में गिरे तो भी वो शुध्ध हो जाता है।
वैसे ही अगर अशुध्ध मन में सदगुरु की कृपा की एक बून्द गिरे.....या अशुध्ध मन सदगुरु की याद में भी जुड़े तो वो शुध्ध हो जाता है।��