एक तू ना मिला, सारी दुनिया मिले भी तो क्या है
मेरा दिल ना खिला, सारी बगियाँ खिले भी तो क्या है ...
धरती हूँ मैं और तू है गगन, होगा कहा तेरा मेरा मिलन
लाख पहरे यहा, प्यार दिल में पले भी तो क्या है ....
तकदीर की मैं कोई भूल हूँ, डाली से बिछड़ा हुआ फूल हूँ ...
साथ तेरा नहीं, संग दुनियाँ चले भी तो क्या है ....
तुझ से लिपटकर जो रो लेते हम, आँसू नहीं थे ये मोती से कम..
तेरा दामन नहीं, ये आँसू ढले भी तो क्या है..